priyanka

no defeat is final until you stop trying.......

36 Posts

521 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 3063 postid : 7

महात्माओं पर स्टिंग ऑपरेशन ,.................

Posted On: 18 Sep, 2010 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

पिछले हफ्ते समाचार चैनलों ने राष्ट्रमंडल खेलो से कुछ ब्रेक लेकर एक दूसरी खबर दिखाई …….. कुछ महात्माओं पर स्टिंग ऑपरेशन किया गा था …. वैसे तो मै ज्यादा महात्माओं को जानती नहीं हूँ धार्मिक चैनलों से मै कुछ दूर ही रहती हूँ ……. पर यह खबर देखकर मन बड़ा प्रशन्न हुआ की चलो शायेद कुछ लोगो का भ्रम टूटे …….. जो इन महात्माओं की अंधी श्रद्धा में डूबे है शायेद उनकी आँखों से पर्दा हटे……………. पता नहीं कैसे लोग इन महात्माओं के जाल में फँस जाते है …………… एक तो सबसे बड़ी बात इन महात्माओं ने जो फैला रेखी है की बिना गुरु मंत्र लिए आप का कोई दान पुण्य मना नहीं जाएगा सब व्यर्थ है और इश्वर तक पहुँचने का रास्ता गुरु मन्त्र लेने के बाद ही मिलता है ……………. अगेर ऐसा सच में है तो सबसे पहले वो सारे गुरु ही इश्वर से मिल कर क्यों नहीं आ जाते ……….और धन्य हो जाते ……………… पता नहीं क्यों इतनी सी बात सबकी समझ में नहीं आती ……….. इश्वर आपके मन में है कण कण में है फिर लोग कहाँ और किसका सहारा लेकर लोग उसे ढूंढने निकल पड़ते है ……… ये सब एक भ्रम जाल है जो इन तथाकथित महात्माओं ने फैला रखा है ………………. लोगो का काला धन सफ़ेद करते हुए पकडे गए ये महात्मा न जाने कितने बहाने देते हुए दिख रहे थे……….. हमारे नेतागण जब ऐसे किसी स्टिंग ऑपरेशन में फंसते है तो वो सारा ठीकरा दूसरी पार्टी पर फोड़ देते है कहते है की ये विपछ की साजिश है अब ये पूजनीय महात्मा संत क्या कहे …………………. लोगो को अपने प्रवचन में न जाने कितने सदमार्ग पर चलने के उपदेश देते है लेकिन जब स्वयं की बात आती है तो इनमे से कितने होंगे जो सच में सदमार्गी होंगे …………….. मुझे आज तक ये सत्संग प्रवचन समझ में ही नहीं आये ………….शादी के बाद सासू माँ के जबर्दस्ती ले जाने पर मै एक सत्संग में गई थी पर वहाँ जाने पर मुझे इतनी अच्छी नींद आई की पूछिए मत मैंने बड़ी कोशिश की ध्यान लगाने की आखिर बोल क्या रहे है पर सब सर से ऊपर ……… इसलिए सो ही गई सासुमा तो मेरे आगे बैठी थी इसलिए उन्हें पता ही नहीं चला की उनकी बहुरानी तो इतना बड़ा पाप कर रही है…….. असल में उनका कहना है की सत्संग में जो जाए और जाकर सो जाए उससे बड़ा कोई पापी नहीं …… लेकिन मैंने तो ऐसे पाप कई बार किए फिर जब उन्हें मेरे सो जाने के बारे में पता चला तो अब ले जाना ही बंद कर दिया ….चालू जान छुटी….. एक बार एक सत्संग में पालथी किए हुए पाँव दर्द करने लगे तो मैंने सोचा थोड़ा फैला लिया जाए मेरे पाँव फैलाने की देर ही थी की आस पास बैठी सारी औरते मुझे यूँ घूरने लगी और एक ने तो मुझे टोक ही दिया की सामने भगवान् बैठे है और तुम उन्हें पाँव दिखा रही हो …….. मै चकबका गई फिर मैंने कहा की आपके भगवान् तो सामने बैठे है और मेरे भगवान् तो चारो दिशाओं में है तो मै किस तरफ पाँव न फैलाऊ ………… वो मुझे गुस्से में देखने लगी और मै हंसने लगी….. मुझे ये जान कर आश्चर्य हुआ की इन सारे महात्माओं ने कितना अंदर तक लोगो को अपना गुलाम बना रखा है …… इन महात्माओं के आश्रमों में बाकायदा इनकी आरती होती है जिसमे किसी भगवान् का जिक्र न होते हुए इनका गुणगान होता है और रामायण की तरह इनके नाम पर भी रामायण लिखा गया है …..और ये भी कहते है की इनके नाम के लिखे हुए रामायण के पाठ करने से सारे दुःख दर्द मिट जाते है ……………. पहले पहल तो मुझे विश्वास ही नहीं हुआ और मुझे खुद भी यकीन नहीं होता की एक अच्छी बहु बनने के चक्कर में मैंने ये सब आरतिया की और रामायण भी पढ़े ……. पर अब मेरे सर से ये भुत उतर चूका है …..एक अच्छी बहु बनने का……… सच में कितना बड़ा मायाजाल रचा है इन महात्माओं ने ……. और न जाने कितने लोगो को अपने इस जाल में फाँस रखा है ……… पर हमारी आम जनता जिस तरह नेताओं को पहचान नहीं पाती और हर बार गलत लोगो को जिताती रहती है उसी तरह ये आम जनता इन ढोंगी बाबाओ को भी नहीं पहचान पाती है………. ये सारे महात्माओं ने अपने अपन नाम से कई स्कूल खोल रखे है अपने नाम से आयुर्वेदिक दवाइआ निकालते है ………….साबुन शेम्पू च्वनप्राश और न जाने क्या क्या ……… इन तरीको से भी जब पैसे कम पड़ते है अपने नाम से आश्रम खोल लेते है ………….वहा न जाने कितना दान चदावा आता है ………… फिर भी इन संतो को पैसे कम पड़ जाते है ….. और गलत तरीको से कमाने की कोशिश करते है ……………….. अरे हाँ धार्मिक चैनलों में आकर प्रवचन देने के भी तो ये अच्छी खासी रकम लेते है …… और इन प्रवचनों में होता क्या है बेटे बहू की बुराई आजकल के समय की बुराई
बस यही होता है ……… क्योंकि इन्हें सुनने आने वाली ज्यादातर जनता में बूढ़े-बुजुर्ग लोग ही होते है जो अपने बेटे बहु से नाखुश होते है उन्हें ये सब सुनकर आनंद ही होता है ……………… आजकल प्रवचन और सत्संग करना भी एक धंधा बन गया है …………… वैसे सत्संग और प्रवचन करना कोई बुराई नहीं है पर जब इन महात्माओं की करतूतों को देखती और सुनती हो तो मन दुखी हो उठता है ……………. और वो भी इतने बड़े बड़े महात्माओं के नाम सुधांशु महाराज और आशा राम बापू जी के नाम सुन कर मन में सवाल उठना स्वाभाविक भी है ….. की क्यों इतने बड़े महात्मा होते हुए भी ये लोग धन के मोह-जाल से अपने आप को दूर नहीं रख पाते है ……… आखिर क्यों………… ???

| NEXT

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 3.50 out of 5)
Loading ... Loading ...

14 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

daniel के द्वारा
September 27, 2010

ढोंगी महात्माओ की करतूतों पर मन व्याकुल होना स्वाभविक ही है ! आपका लेख इसकी सहज प्रतिक्रिया मात्र ही है !! लेकिन इसे ही अंतिम सत्य मान कर न बैठ जाएँ ! पियूष जी का कथन बिलकुल सत्य है !! आपको किसी गुरु की तलाश में भटकने की ज़रूरत नहीं ! जब कभी समय मिले तो शांत मन से इश्वर को याद करना न भूलें !! शैन-शैन सत्य प्रकट होने लगेगा !! ***हार्द्रिक शुभकामनाये***

    priyasingh के द्वारा
    September 27, 2010

    आपकी शुभकामनाओ के लिए शुक्रिया….

dhirendra के द्वारा
September 24, 2010

Priyanka ji, merra yahi manana hai ki wahi kerna chahiya jisko aap samajh payee aur santusthi miley, aaj aapney yeh lekh likh ker yeh sabit kerdiya ki badey bujurg hi nahi apitu navjavan bhi ek follower ban ker rehjatey hai. Soachney samjhney ki shakti na hooney ki wajeh sey bhi asi pristhiti aati hai…… well written …..

sd के द्वारा
September 20, 2010

धार्मिक होना और धर्म के नाम पर दूकान चलाना अलग अलग बातें हैं। धर्म के मर्म को समझ लेने वाला ठगेगा नहीं। वह रास्‍ता बताएगा-दिखायेगा। और , रास्‍ता तो वही बता दिखा सकता है जो चला हो या चल रहा हो। इतने तथा कथित भगवान और ईश्‍वर के एजेंट हैं ,इसके बावजूद देश-समाज का यह हाल है ।ये स्‍वयंभू भगवान नेताओं से भी ज्‍यादा देश का अहित कर रहे हैं।

Dharmesh Tiwari के द्वारा
September 19, 2010

नमस्कार प्रिया सिंह जी,सत्संग सुनना बुरी बात नहीं,लेकिन सत्संग,वैसे आज कल जो अधिकतर हो रहा है उसका आपने चित्रण बहुत ही जबरदस्त तरीके से किया है,सुन्दर प्रस्तुती,धन्यवाद

    priyasingh के द्वारा
    September 20, 2010

    आपको भी मेरी तरफ से नमस्कार ….. सही कहा आपने सत्संग सुनना बुरी बात नहीं है बस अपनी अपनी पसंद की बात है …….

Ritambhara tiwari के द्वारा
September 19, 2010

आजकल धर्मं भी एक बिजनेस बनता जा रहा है aise me hume hi apne vivek se kam lena hoga….एक achchha lekh , बधाई!!

    priyasingh के द्वारा
    September 20, 2010

    सही कहा आपने पर हर कोई अपने विवेक का इस्तेमाल करता कहा है …… प्रशंसा के लिए धन्यवाद…

palash के द्वारा
September 18, 2010

priyanka ji maan gayeaapne to apni sasu ma ki itni buraee kar dali …………….dil khol kar wah

    priyasingh के द्वारा
    September 20, 2010

    पलाश जी लेख ध्यान से पढ़िए सासु माँ की नहीं ढोंगी बाबाओं की बुराई की है ………… बुराई वो भी सासु माँ की कभी नहीं ……

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
September 18, 2010

प्रिय जी………… जो आपने लिखा है वो काफी हद तक सही है……… पर इतना कह कर हम ये नहीं कह सकते की………………. पता नहीं कैसे लोग इन महात्माओं के जाल में फँस जाते है……………….. भारतीय संस्कृति अपनी अध्यात्मिक विचारधारा के मूल्यों पर टिकी है………… ये महात्मा जिनको लोग गुरु भी बनाते है और मानते है…………. उनका काम अपने शिष्यों को संसार में रह कर संसार से दूर रहने का ज्ञान देना है….. पूर्व में राम कृष्ण परमहंस, स्वामी दयानंद, स्वामी रामानंद जैसे कई लोगों ने ये काम किया……. वर्तमान में जितने भी लोग इस तरह के अनैतिक कार्यों में लिप्त हैं…… वो वास्तव में उन लोगों की बोई फसल काट रहे हैं……….. जिन्होंने इस क्षेत्र में कई बड़े काम किये…………. सो गलत की बुरे करें पर किसी पूरी प्रक्रिया को गलत न ठहराएँ……………. कुल मिला कर ढोंगियों के खिलाफ एक अच्छा लेख……….

    priyasingh के द्वारा
    September 18, 2010

    पूर्व में जो संत महात्मा थे वो तो सच के संत महात्मा थे और यदि आज वो होते तो मै भी कब की गुरुमंत्र ले चुकी होती …… पर वर्तमान के महात्माओं का हाल देखते हुए मैंने अपने ये विचार व्यक्त किए थे …… बाकि किसी भी प्रक्रिया या गुरु शिष्य की परम्परा पर मै सवाल नहीं उठा रही हूँ…………………… आपकी लोक कथाये वाकई में बहूत अच्छी होती है……………………

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    September 18, 2010

    नहीं प्रिया जी……. अभी भी कई संत हैं जो वास्तव में सच्चे संत है…….. पर वो इस पटल पर आना ही नहीं चाहते…… जिसको परमात्मा की खोज है या जो उस गुरु को खोज रहा है उसको खुद गुरु खोज लेता है……….. अपने ब्लॉग में मैंने गुरु पर नवीनतम लेख लिखा है…….. चाहें तो पढ़ सकते है…..

    priyasingh के द्वारा
    September 20, 2010

    तब तो इंतज़ार है ऐसे गुरु का ………. आपका लेख पढ़ा गुरु और शिक्षक का अंतर आपने बहूत ही अच्छे से समझाया है ……… मुझे भी ये दोनों शब्द एक ही लगते थे ………… धन्यवाद………………………


topic of the week



अन्य ब्लॉग

  • No Posts Found

latest from jagran