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"वो पुराने दिन ..."

Posted On: 21 Oct, 2010 Others में

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मन की रद्दी टोकरी में फेंके हुए वो दिन
रोज़ की आपा-धापी में भूले हुए वो दिन
वो पुराने दिन …
कभी-कभी जब फुरसत के पलों को ढूंढ़कर उन्हें याद करती हूँ
तो मन को सहला जाते है
वो पुराने दिन…
ज़िन्दगी की उलझने जब उलझा देती है
समय व परिस्थितिया जब रुला देती है
ऐसे में ज़बर्दस्ती याद कर लेती हूँ
वो पुराने दिन…
वो दिन भी क्या दिन थे
जब छोटी छोटी खुशिया ही हंसा देती थी
वो भूतो वाली ईमली के पेड़ की कच्ची ईमली की खटास
वो नुक्कड़ वाले काका की गरमागरम जलेबी की मिठास
वो खट्टे-मीठे पुराने दिन…
वो पच्चीस पैसे के गटागट, एक रूपये की छह पानी-पूरी
वो गुरुवार के बाज़ार की सोंधी-सोंधी करारी भुनी मूंगफली
वो सस्ते से पुराने दिन…
वो सुबह-सुबह टन-टन-टन स्कूल की घंटी
वो सर की हाथ में पड़ती पतली सी डंडी
वो छुप-छुप के स्कूल से भागना
पकडे जाने पर झूठे आंसुओ का बहाना
वो शरारती पुराने दिन…
घर पहुंच कर मम्मी को सारी बाते कहना
किताबो के अन्दर कामिक्स रख कर पढना
गणित के कम नंबर डैडी से छुपाना
भूखे होने पर भी सीरिअल के समय पर ही खाना खाना
वो बहाने वाले पुराने दिन…
वो कालेज में नीम के पेड़ के नीचे सहेलियों से बतियाना
बात बात पर हंसी का छुट जाना
अचानक चाँद-तारो, फुल-खुशबु, बारिश की बूंदों से प्यार हो जाना
वो सलमान खान का सपनो में आना
सपने से वो पुराने दिन…
पंख लगाकर उड़ जाते है वो पुराने दिन
इसलिए मन की तिजोरी में याद बनाके बंद कर लिया है
वो हीरे से अनमोल पुराने दिन…

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16 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Coolbaby के द्वारा
October 23, 2010

wow …………I am no longer baby nor a child,I was a year before teen,I think eveymoment we grow up and pass to next moment…….the past moment seems to be Dream…..a sweet dream.I read this article and now I am in need of a Time Machine ,comes and takes me backword ……..I know this machine exists and that is our mind and his memories. Thanx

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
October 22, 2010

हर किसी के बचपन के दिन लगभग एक से ही होते हैं…….. और हर कोई इन दिनों को बार बार जीना चाहता है……. आज एक बार फिर इन दिनों को दुबारा से जीने की इच्छा हो गयी है.. सुन्दर कविता के लिए हार्दिक बधाई….

    priyasingh के द्वारा
    October 23, 2010

    कई दिनों बाद आपकी टिपण्णी मिली………. मेरी कविता के माध्यम से आपको पुराने दिन याद आये मेरा मकसद पूरा हुआ …………….

div81 के द्वारा
October 21, 2010

कोई लोटा दे वो बीते हुए दिन ऐसा ही तो खुबसूरत होता है बचपन | अच्छी रचना बधाई स्वीकार करें

    priyasingh के द्वारा
    October 23, 2010

    सराहना के लिए धन्यवाद ………

chaatak के द्वारा
October 21, 2010

प्रिय जी, आपने तो ‘वो कागज़ की कश्ती वो बारिश का पानी’ की याद दिला दी| आपकी पंक्तिया हर दिल में ‘गुजरा ज़माना बचपन का’ की हूंक उठाती है| युवाओं को भी कहीं न कहीं आपकी कविता ‘कोई लौटा दे वो प्यारे-प्यारे दिन’ कहने पर मजबूर कर रही है| इतनी अच्छी कविता के लिए आपको हार्धिक बधाइयाँ!

    priyasingh के द्वारा
    October 23, 2010

    कविता के माध्यम से कवी जो कहना चाहता है वो सबको पसंद आये और लोग उसकी क़द्र करे तो एक कवी को और क्या चाहिए ………..धन्यवाद

ajaykumarjha1973 के द्वारा
October 21, 2010

वाह वाह क्या दिलचस्प शैली है और प्रभावी भी बन पडी है ..बहुत बहुत शुभकामनाएं

    priyasingh के द्वारा
    October 23, 2010

    सराहना के लिए धन्यवाद……….

K M MIshra के द्वारा
October 21, 2010

वो भूतो वाली ईमली के पेड़ की कच्ची ईमली की खटास वो नुक्कड़ वाले काका की गरमागरम जलेबी की मिठास वो खट्टे-मीठे पुराने दिन… वो पच्चीस पैसे के गटागट, एक रूपये की छह पानी-पूरी प्रिय जी नमस्कार ।कुछ ऐसे ही दिन कभी हमारे भी बीते थे । यादों के बक्से में झांक कर देखा तो पुरानी गठरी में एक कोने में बंधे पड़े हैं । याद दिलाने के लिये आभारी हूं ।

    K M MIshra के द्वारा
    October 21, 2010

    प्रिय X “प्रिया”

    priyasingh के द्वारा
    October 23, 2010

    आभारी तो मै हूँ की मेरी कविता का उद्देश्य पूरा हुआ आपने अपनी यादो की गठरी दोबारा खोली ………

Aakash Tiwaari के द्वारा
October 21, 2010

प्रिय जी, बहुत खूब और विस्तार में लिखा है आपने…बधाई कबूल करें. आकाश तिवारी

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    October 21, 2010

    माफ़ कीजियेगा “प्रिया” की जगह प्रिय लिखा है.. आकाश तिवारी

    priyasingh के द्वारा
    October 23, 2010

    मात्रायों का हेर फेर तो हो ही जाता है इसमें मांफी मांगने की आवश्यकता नही है ……………… आपने कविता को सराहा इसके लिए धन्यवाद …..


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