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आओ कोई ख्वाब बुने ....

Posted On: 14 Nov, 2010 Others में

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मन के आसमान पर सपनो का बादल चुने
की आओ कोई ख्वाब बुने…
वो ख्वाब हमारी आँखों का
वो ख्वाब हमारी साँसों का
संभाला हो जिसे हमारे हाथो ने
रचा हो जिसे हमारी धड़कन ने
जिसमे हो सिर्फ हमारा असर
महसूस करे सिर्फ हमारी नज़र
ऐसा कोई संसार बने
की आओ कोई ख्वाब बुने…
वो ख्वाब सतरंगी रंगों सा
वो ख्वाब झरने के निर्मल जल सा
वो ख्वाब फूलो सा कोमल
वो ख्वाब हवा सा शीतल
अरमान हमारा साकार बने
की आओ कोई ख्वाब बुने…

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16 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

chaatak के द्वारा
November 16, 2010

प्रिया जी, आपकी कविता पढ़कर अनायास ही मुझे अपना एक ख्वाब स्मरण हो आया- “दिन का स्वागत करती कोयल, रात सुहानी बुलबुल की | आठ पहर का रैन बसेरा, गिनती क्या पल दो पल की | आओ उठें एक गीत लिखें फिर, खुशी समेटें पल-पल की | लौट चले फिर से बचपन में, फिक्र रहे न जीवन की |” अच्छी कविता पर बधाई!

ashvinikumar के द्वारा
November 16, 2010

यकीनन आपके ख़्वाबों की दुनिया बहुत ही खुबसूरत है,,काश जीवन भी एक ऐसा ही ख़्वाब बन जाए वैसे जब आपने मुझे कमेन्ट किया लगभग उसी समय मैने आपको कमेन्ट किया..इतफाक है पर अजीब नही….आपको भी शुभ रात्री

ankitshukla के द्वारा
November 15, 2010

बहुत अच्छी …….. अंकित Shukla

nishamittal के द्वारा
November 15, 2010

प्रिया जी,दो बार ऐसा हो चुका है कि मेरे द्वारा प्रतिक्रिया व्यक्त की गयी और आपके पास नहीं पहुँची.आज सुबह भी पोस्ट की थी,कारण समझ नहीं आया. चलिए पुनः प्रयास करती हूँ आपके हमारे सबके बुने सुन्दर ख्वाब साकार हों ऐसी शुभकामनाओं के साथ.

suryaprakash tiwadi के द्वारा
November 15, 2010

ख्वाब ही हकीकत का रूप लेते है.इसलिए हर इंसान को ख्वाब बुनते रहना चाहिए.सुन्दर कविता मन को छु गई

aksaditya के द्वारा
November 15, 2010

ब्लागों की दुनिया में शीतल हवा के झोंके का अहसास कराती कविता |

priyasingh के द्वारा
November 14, 2010

आप सबकी आभारी हूँ मेरी इस प्रस्तुति को पसंद करने के लिए ……

alkargupta1 के द्वारा
November 14, 2010

ये ख्वाब ही कार्य रूप में परिणित होकर हकीकत में बदल जाते हैं बस बुनती रहिए…… निश्चित ही अरमान पूरे होंगे। बहुत अच्छी प्रस्तुति

harishbhatt के द्वारा
November 14, 2010

बहुत ही अच्छी दिल को छू जाने वाली कविता के लिए हार्दिक बधाई.

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
November 14, 2010

सुन्दर रचना ………. मजबूर करती है की ———————– वो ख्वाब सतरंगी रंगों सा वो ख्वाब झरने के निर्मल जल सा वो ख्वाब फूलो सा कोमल वो ख्वाब हवा सा शीतल अरमान हमारा साकार बने की हम भी कोई ख्वाब बुने… बधाई………

kmmishra के द्वारा
November 14, 2010

वो ख्वाब सतरंगी रंगों सा वो ख्वाब झरने के निर्मल जल सा वो ख्वाब फूलो सा कोमल वो ख्वाब हवा सा शीतल अरमान हमारा साकार बने की आओ कोई ख्वाब बुने… कोमल एहसासों का अनुभव कराती इस सुन्दर कविता के लिए आभारी हूँ

November 14, 2010

एक मासूम सी कविता प्रियंका जी, बधाई हो और कविता का सफ़र जारी रखिये.

roshni के द्वारा
November 14, 2010

प्रिया जी बहुत सुन्दर .. आओ कोई खवाब बुने , युही खवाब बुनती रहिये और हमारे साथ बनते रहिएगा

abodhbaalak के द्वारा
November 14, 2010

प्रिया जी, आपने इस शैली को भी उतनी ही सुन्दरता से दर्शाया है जितना की पहले के लेखों में, हम सब ही ऐसे ही सुन्दर सपनो की आशा है, जहाँ हम अपने सपनो को साकार कर सकें . http://abodhbaalak.jagranjunction.com

rajkamal के द्वारा
November 14, 2010

इक नया अंदाज़ …. अपने आप में निवेकली रचना …. उम्मीदों के इक नये संसार की रचना की रह दिखाती हुई …

Coolbaby के द्वारा
November 14, 2010

Dreamless :-) Lets leave all the dreams, which cant be fullfilled, has no luck to be came true, Lets ride the true life, suffering sorrows if has exist, the coming bliss is on around the corner. :-) with apologises


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