priyanka

no defeat is final until you stop trying.......

36 Posts

521 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 3063 postid : 66

क्या गरीब भी सपने देखता होगा...???

Posted On: 16 Nov, 2010 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

मेरे सपनो में फूल खिलते है, हवा महकती है , चाँद चमकता है ….

तो सोचती हूँ की किसी गरीब के सपनो में क्या होता होगा …

क्या उसके सपनो में कांटो की चुभन, गर्म उमस भरी हवा, चिलचिलाती धुप होती होगी …

मेरे सपनो में बांसुरी की रागिनिया सुनाई देती है …

क्या उसके सपनो में हथोड़े की ठक-ठक सुनाई देती होगी…

मेरे सपनो में बारिश की ठंडी फुहारों का झोंका आता है …

क्या उसको छत से टपकती बारिश की बुँदे सोने नही देती होंगी…

क्या उसके सपने भी उसके खाने की तरह रूखे-सूखे होते होंगे…

क्या उसके सपने भी उसके कंधो की तरह झुके और दबे हुए होंगे…

मेरे सपने सुनहरे कल से सजे हुए होते है…

तो…

फिर सोचती हूँ की कल की चिंता में सोया हुआ…

वो गरीब क्या सपने भी देखता होगा …!!!

| NEXT

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (6 votes, average: 4.83 out of 5)
Loading ... Loading ...

16 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
November 19, 2010

वो देखता था सब कुछ पा भी जाता था । लेकिन जब आंख खुलती तो सपना पाता था । यही तो होता है गरीब के साथ । उसके बारे में सोचता कौन है । आपने सोचा बधाई व धन्‍यवाद उस गरीब की ओर से क्‍योंकि वह इस मंच तक पहूँचनें का बस सपना देखता होगा । अरविन्‍द पारीक

priyasingh के द्वारा
November 17, 2010

आप सबका आभार मेरी रचना को पसंद करने के लिए …

roshni के द्वारा
November 17, 2010

priya ji सपने ही तो है जो बिना मोल के देखे जा सकते है .. और गरीब सपने देखता होगा मगर सिर्फ सपने .. और उन सपनो को सच करने का सपना तो शायद भूल से भी न देखता होगा… गरीब की सपनो के सच को उजगर करती कविता के लिए आभार

abodhbaalak के द्वारा
November 17, 2010

Priya ji, sorry for writing in English, Hindi font is not supporting, thanks for putting such a nice picture of my nephew, seems very cute indeed, Upar wale se prarthna hai ki kisi ki buri nazar na lage. bahut chhoti se kavita me aapne bada hi sundar chitran kia hai, ek gareeb aur apne sapno ka lekin iski sabse last pankti hi me iska saar bhi hai ki wo gareeb kya sapne bhi dekhta hoga? sundar rachna badhaai ho

अरुण कान्त शुक्ला \'आदित्य\' \\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\' के द्वारा
November 16, 2010

सपनों में फूल खिलते हैं , हवा महकती है , चाँद चमकता है , मेरा विश्वास करो , गरीब के सपनों को रोंदे बिना , किसी के भी सपनों में , न कभी , फूल खिला है , हवा महकी है ,और न चाँद चमका है एक सुन्दर ख्याल और कविता के लिये बधाई |

chaatak के द्वारा
November 16, 2010

ठपथराई आँखों के सपने सजा रही दीवारें, किसे खबर है देखने इनमे कितनी पड़ी दरारें; कितने आंसू कितने सपने इनमे दबे पड़े हैं होंठ सूख कर मूक हो गए दिल में दबे शरारे; प्रिया जी, गरीबों के सपने इसी तरह आँखों की दरारों और सूखे होठों में घुट कर रह गई है| ये गरीबों के ही सपने हैं जो ऊंची-ऊंची मीनारों और महलों के कंगूरों पर लटके हैं| आपकी कविता के एक-एक शब्द न जाने कितनी आहों की याद दिलाते है गरीबों के सपनो पर इतनी खूबसूरत कविता में इतनी गंभीर सोच रखने पर आपको कोटिशः बधाईयाँ!

chaatak के द्वारा
November 16, 2010

\"पथराई आँखों के सपने सजा रही दीवारें, किसे खबर है देखने इनमे कितनी पड़ी दरारें; कितने आंसू कितने सपने इनमे दबे पड़े हैं होंठ सूख कर मूक हो गए दिल में दबे शरारे;\" प्रिया जी, गरीबों के सपने इसी तरह आँखों की दरारों और सूखे होठों में घुट कर रह गई है| ये गरीबों के ही सपने हैं जो ऊंची-ऊंची मीनारों और महलों के कंगूरों पर लटके हैं| आपकी कविता के एक-एक शब्द न जाने कितनी आहों की याद दिलाते है गरीबों के सपनो पर इतनी खूबसूरत कविता में इतनी गंभीर सोच रखने पर आपको कोटिशः बधाईयाँ!

alkargupta1 के द्वारा
November 16, 2010

वो गरीब क्या सपने भी देखता होगा …….। अवश्य …..झुके हुए व दबे हए सपनों को हकीकत में बदलने के सपने देखता होगा…………….बहुत ही अच्छी प्रस्तुति

November 16, 2010

कुछ नहीं दीखता सपने में गरीब को, रोटियाँ सूखी हुईं, नमक फीका दाल में, और थोड़ी सी भी नहीं, सब्जी है नसीब को. एक संवेदनशील कविता, प्रिया जी.

kmmishra के द्वारा
November 16, 2010

सरकार को चाहिए कि वह खोल दे उनके लिए भी एक बूचड़खाना जिसमे उनको पकड, पकडकर सफाई का पूरा ध्यान रखते हुए, सफाई से काट़ दिया जाए ॥ जिन्हे गरीबी की महान रेखा के नीचे रहने योग्य भी नही पाया गया है . -व्यंग कविता ….गिरीश नागड़ा प्रिया जी नमस्कार । गरीब जरूर सपने देखता होगा पर सपने में क्या देखता होगा । भूख, गरीबी, बीमारी, बेरोजगारी या फिर देखता होगा ऋण लेकर खरीदा गया रिक्शा, या पान की गुमटी या सामान ढोने वाली छोटी सी टेंपो । पता नहीं क्या देखता होगा । शायद बच्चों के लिये कपडे खरीदता होगा सपने में या फिर बीवी को दारू पीकर धुनकता होगा या फिर बूढ़े बाप का मोतियाबिंद का आपरेशन करवाता होगा और अम्मा के जोड़े के दर्द के लिये सरकारी हस्पताल का चक्कर लगाता होगा । पता नहीं क्या देखता होगा वह ।

sdvajpayee के द्वारा
November 16, 2010

 ऐसी कवितायें कम ही देखने को मिलती हैं जो उत्‍तरोत्‍तर भावों के गहरे धरातल तक यात्रा कराती जाएं। इस कविता में भी कुछ ऐसा है कि बीच या किनारे से नहीं कटा जा सकता। अंत तक साथ रह कर यात्रा करनी ही पडेगी। भावों का चरमोत्‍कर्ष तो अंत में दृष्‍टव्‍य है-क्या उसके सपने भी उसके कंधो की तरह झुके और दबे हुए होंगे… मेरे सपने सुनहरे कल से सजे हुए होते है… तो… फिर सोचती हूँ की कल की चिंता में सोया हुआ… वो गरीब क्या सपने भी देखता होगा …!!!

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
November 16, 2010

नहीं मैं नहीं मानता की गरीब के सपनो में कांटो की चुभन, गर्म उमस भरी हवा, चिलचिलाती धुप होती होगी … या ऐसा कुछ भी और जैसा आपने सोचा है………… अपितु उसके सपनो में आपके और हमारे सपनो से कही आगे की कल्पनाएँ होती होंगी………. क्योकि जो सपने हम बंद आँखों से देखते हैं…………. उन को वो खुली आँखों से देखता है………. धरातल पर भले ही वो गरीब हो पर सपनो में वो गरीबी को कहीं पीछे छोड़ अमीरों से भी ऊँचे सपने देखता होगा………….. सुन्दर रचना………….

jalal के द्वारा
November 16, 2010

वैसे यह साड़ी बात उनके साथ समय बीताने से ज़रूर मालुम चल जायेंगे. फिलहाल आपका दिल तो पिघल चूका है. अच्छी है.

Manoj के द्वारा
November 16, 2010

बेह्द सुन्दर कविता….

Dharmesh Tiwari के द्वारा
November 16, 2010

नमस्ते प्रिय सिंह जी………कल की चिंता में सोया हुआ… वो गरीब क्या सपने भी देखता होगा ………………पता नहीं आज गैब को इसका भी हक़ है या नहीं,धन्यवाद!

    rajkamal के द्वारा
    November 16, 2010

    प्रिय जलाल भाई …आदाब ! जो गलती आप से हुई वोह मेरे से भी हुई थी … इसलिए आगे से प्रिया जी को उनके पूरे नाम प्रियांका से बुलाया कीजिये


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran