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आज चाँद कुछ उदास है ...

Posted On: 21 Feb, 2011 Others में

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आज चाँद कुछ उदास है,
मौसम भी कुछ बेखास है
छाया हुआ है मनहुसिअत का आलम
सोचती हूँ हमारे मन में संवेदनाये है भावनाए है
किसी अजनबी के दुःख से दुखी हो जाता है हमारा मन
और अपनों की परेशानियों से तो सहम जाता है हमारा मन
फिर कैसे किसी का इतना निर्दयी हो जाता है मन
की हजारो-लाखो लोगो की मौत की कल्पना कर जाता है
और इस कल्पना को साकार भी कर देता है
कैसे इंसान इतना कठोर हो जाता है
वो इंसान, इंसान नहीं शायद जानवर हो जाता है
शायद ही क्योंकि जानवरों की कौम को बदनाम करना ठीक नहीं
जानवर तो अपना पेट भरने के लिए ये करते है
और इंसान तो बस निजी स्वार्थ के लिए इसे अंजाम करते है
कितने लोग मर जाते है …………….
और अपने पीछे छोड़ जाते है कई मरी हुई जिन्दगिया
जो ढोते है उनकी मौत का उनकी यादो का बोझ
और अपनी जलाई-दफनाई खुशियों का बोझ
एक टीस एक कसक उन सबके दिल में है
काश! जो हुआ वो न हुआ होता
हम जिन आतंकियो को मार देते है
या जेल में बंद कर देते है
उन्हें उन परिवारों के पास भेजे
जो अपनों की मौत को रो रहे है
‘शायद’ उन्हें तब ये अहसास हो जाये
जो उन्हें अभी नही हो रहा
किसी माँ की सूनी आँखे …
किसी बाप का अनकहा दर्द…
किसी बच्चे का तोतला रोना…
किसी पत्नी की मरी हुई चल रही साँसे…
देख के ‘शायद’ उनके अहसास जाग उठे
‘शायद’ उनका जमीर धिक्कार उठे
कितने ‘शायद’ है अपने जीवन में
काश एक दिन ये ‘शायद’ कम हो जाये
मौसम कुछ ख़ास हो जाये
और… ‘शायद’
चाँद फिर खिल उठे………………

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28 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

allrounder के द्वारा
February 26, 2011

प्रिया जी, नमस्कार आपकी कविता एक आशा की किरण जगाती है की शायद चाँद खिल उठे, किन्तु जिन लोगों को ये संबोधित की गई है उनकी मानवीय सम्बेदनाये शून्य हो चुकी हैं, वर्ना वे ऐसे घिनौने कृत्यों मैं लिप्त ही न होते ! किन्तु फिर भी हमें चाँद के खिलने की आश नहीं छोडनी चाहिए ! एक अच्छी रचना पर बधाई !

nishamittal के द्वारा
February 25, 2011

संवेदनशील हृदय की भावनाओं को व्यक्त करती सुंदर रचना प्रिया जी,देरी से प्रतिक्रिया का कारण व्यस्तता रही.

rajeevdubey के द्वारा
February 23, 2011

प्रिय जी, एक जिन्दगी अपने आप में पूरा संसार होती है, पर निर्दयी लोग यह नहीं समझते…आपकी संवेदना व्यक्त करती कविता पर बधाई

    priyasingh के द्वारा
    February 24, 2011

    बधाई के लिए आपका आभार…….

vijay kumar के द्वारा
February 23, 2011

आज चाँद कुछ उदास है, मौसम भी कुछ बेखास है छाया हुआ है मनहुसिअत का आलम सोचती हूँ हमारे मन में संवेदनाये है भावनाए है किसी अजनबी के दुःख से दुखी हो जाता है हमारा मन और अपनों की परेशानियों से तो सहम जाता है हमारा मन फिर कैसे किसी का इतना निर्दयी हो जाता है मन की हजारो-लाखो लोगो की मौत की कल्पना कर जाता है और इस कल्पना को साकार भी कर देता है कैसे इंसान इतना कठोर हो जाता है वो इंसान, इंसान नहीं शायद जानवर हो जाता है शायद ही क्योंकि जानवरों की कौम को बदनाम करना ठीक नहीं जानवर तो अपना पेट भरने के लिए ये करते है और इंसान तो बस निजी स्वार्थ के लिए इसे अंजाम करते है कितने लोग मर जाते है ……………. और अपने पीछे छोड़ जाते है कई मरी हुई जिन्दगिया जो ढोते है उनकी मौत का उनकी यादो का बोझ और अपनी जलाई-दफनाई खुशियों का बोझ एक टीस एक कसक उन सबके दिल में है काश! जो हुआ वो न हुआ होता हम जिन आतंकियो को मार देते है या जेल में बंद कर देते है उन्हें उन परिवारों के पास भेजे जो अपनों की मौत को रो रहे है ‘शायद’ उन्हें तब ये अहसास हो जाये जो उन्हें अभी नही हो रहा किसी माँ की सूनी आँखे … किसी बाप का अनकहा दर्द… किसी बच्चे का तोतला रोना… किसी पत्नी की मरी हुई चल रही साँसे… देख के ‘शायद’ उनके अहसास जाग उठे ‘शायद’ उनका जमीर धिक्कार उठे कितने ‘शायद’ है अपने जीवन में काश एक दिन ये ‘शायद’ कम हो जाये मौसम कुछ ख़ास हो जाये और… ‘शायद’ चाँद फिर खिल उठे………………

Harish Bhatt के द्वारा
February 23, 2011

प्रियंका जी नमस्ते, बहुत ही बेहतरीन कविता के लिए हार्दिक बधाई

    priyasingh के द्वारा
    February 24, 2011

    आभार आपका……….कविता की सराहना के लिए ……..

rajkamal के द्वारा
February 22, 2011

priynka ji …nmskaar ! काश एक दिन ये ‘शायद’ कम हो जाये मौसम कुछ ख़ास हो जाये और… ‘शायद’ चाँद फिर खिल उठे…… उम्मीद पर जब यह सारी की सारी ही दुनिया कायम है तो हमे इस मामले में भी उम्मीद का दामन नहीं छोड़ना चाहिए …. एक कवियत्री की बहुत ही आशा भरी कल्पना

    priyasingh के द्वारा
    February 24, 2011

    हौसलाफजाई का शुक्रिया ………

R K KHURANA के द्वारा
February 22, 2011

प्रिय प्रिया जी, मन के पीड़ा को उकेरती एक अच्छी कविता ! राम कृष्ण खुराना

    priyasingh के द्वारा
    February 22, 2011

    सराहना के लिए आपका आभार ……….

charchit chittransh के द्वारा
February 22, 2011

प्रियाजी , एक बार फिर सीधी सरल भाषा में उच्च कोटि की प्रस्तुति के लिए बधाई स्वीकारें ! कल मेरी आतंकवाद सम्बन्धी पंक्तियों पर नजर डालना मत भूलिएगा .

    priyasingh के द्वारा
    February 22, 2011

    सराहना के लिए शुक्रिया………….आप की रचना पर नज़र डालना नही भूलूंगी…………

aftab azmat के द्वारा
February 22, 2011

आज चाँद कुछ उदास है…वह …बहुत खूब रचना…बधाई स्वीकार करें…धन्यवाद…www.aftabazmat.jagranjunction.com

    priyasingh के द्वारा
    February 22, 2011

    प्रशंशा के लिए आपका शुक्रिया…………

shab के द्वारा
February 22, 2011

प्रिय जी बहुत अच्छी रचना है बधाई हो…..

    priyasingh के द्वारा
    February 22, 2011

    आपकी बधाई के लिए शुक्रिया………

आर.एन. शाही के द्वारा
February 22, 2011

प्रिया जी, भावनाएं और उनके उद्गार के लिये भी ईश्वर ने वही स्थान रचे हैं, जहां से संवेदनाओं की प्रत्याशा होती है । जानवरों को हम दोष नहीं दे सकते । क्या आपका पालतू कुत्ता आपके प्यार का रिस्पांस नहीं देता ? लेकिन मनुष्य योनि में जन्मे अजमल कसाब जैसे कसाइयों को देखिये, कोर्ट में मृत्युदंड को बहाल रखने के निर्णय पर भी उसके होठों पर जहरीली मुस्कान है । उसके परिवार को यदि आप शहीद इंस्पेक्टर की विधवा के आंसू दिखा भी दें, तो आतताइयों के मन पर कोई असर नहीं होने वाला । भैंसें बीन की धुन पर थिरकने के लिये नहीं बल्कि पगुराने के लिये विधाता द्वारा रची गई हैं । साधुवाद ।

    priyasingh के द्वारा
    February 22, 2011

    आप जैसे आदरणीय जो भी कहते है वो मेरी लेखनी के लिए अमृत वचन के सामान है ……..आप की प्रतिक्रिया उत्साह वर्धन ही करती है ……..आपका आभार……….

    rajkamal के द्वारा
    February 22, 2011

    आदरणीय गुरु जी ….सादर प्रणाम ! आप एक नयी पहल और नए नज़रिए का विरोध क्यों कर रहे है ….. कुछ चुनिन्दा भैंसे थिरकती भी देखी गई है ….. बाड़े की सभी भैंसे एक समान नही होती…धनयवाद

Aakash Tiwaari के द्वारा
February 22, 2011

प्रिया जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुती ….. आकाश तिवारी

    priyasingh के द्वारा
    February 22, 2011

    आपका धन्यवाद………..

Alka Gupta के द्वारा
February 22, 2011

प्रिया जी , मर्मस्पर्शी रचना है बहुत अच्छी कृति !

    priyasingh के द्वारा
    February 22, 2011

    आपका आभार…………

Rajni Thakur के द्वारा
February 22, 2011

प्रिया जी, वर्तमान की ज्वलंत समस्या आतंकवाद से जाने अनजाने हम सभी लड़ रहे हैं..इसकी संवेदनात्मक प्रस्तुति दिल को छूती है..

    priyasingh के द्वारा
    February 22, 2011

    आपको रचना अछि लगी इसके लिए धन्यवाद………….

shuklabhramar5 के द्वारा
February 21, 2011

Quote:-जो अपनों की मौत को रो रहे है ‘शायद’ उन्हें तब ये अहसास हो जाये जो उन्हें अभी नही हो रहा किसी माँ की सूनी आँखे … किसी बाप का अनकहा दर्द… किसी बच्चे का तोतला रोना… किसी पत्नी की मरी हुई चल रही साँसे… Veri nice priya ji …keep it up…but kya ye theek nahi hota .. ..jo apno ki maut par ro rahe hain… nicely given message ….kaash aisa ho paata ….kaun billi ke gale me ghanti baandhe.. -Bhramarshukla

    priyasingh के द्वारा
    February 22, 2011

    बिल्ली के गले में घंटी बाँधना मुश्किल जरुर है पर नामुमकिन नही …………रचना को सराहने के लिए धन्यवाद…………


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