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शब्दों का ये संसार....

Posted On: 9 Apr, 2011 Others में

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शब्दों का ये संसार ……………………….
शब्द जिनके द्वारा व्यक्त करते है
हम अपनी भावनाए अपने विचार
सोचो…!!! अगर न होते ये शब्द
तो दुनिया कितनी खामोश होती
हम क्या करते हम क्या समझते
हम क्या लिखते हम क्या कहते
पर कभी कभी सोचती हूँ ……….
काश ना होते ये शब्द ……………
दुनिया केवल इन बेजुबान आँखों के सहारे चलती
शरारत इन आँखों की समझ जाती आँखे उनकी
ज़िन्दगी यूँ ही गुजर जाती
मन की समझ के सहारे
किसने बनाए होंगे ये शब्द
कैसे बनाये होंगे ये शब्द
कभी सोचो तो आश्चर्य होता है!
इतिहासकारो ने क्यों नहीं की खोज इसकी
की किसने की है रचना इनकी
छोटे पर विकराल शब्द
जो मुख से निकलते है तो …
कभी कर देते है दुःख कम
कभी कर देते है आँखे नम
पर बिना शब्दों के सहारे रहा भी नहीं जाता है
न बोलो तो जीवन नीरस हो जाता है
तो फिर जीवन नीरस क्यों बनाये
शब्दों के संसार में खेलते चले जाए……….

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13 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Arun Singh के द्वारा
April 13, 2011

सुन्दर रचना…

abodhbaalak के द्वारा
April 10, 2011

Priya ji aapne shabdo par, shabdko ko bun kar jo rachna …………. ati sundar . http://abodhbaalak.jagranjunction.com

rachna varma के द्वारा
April 10, 2011

प्रिया जी बहुत सुन्दर कविता ! शब्दों का मायाजाल सभी को अपने आकर्षण में बांध ही लेता है शब्दों का तिलिस्म अनोखा है , अद्भुत है , सम्मोहक है ! धन्यवाद

वाहिद काशीवासी के द्वारा
April 10, 2011

प्रिया जी, शब्दों के व्यूह कुछ ऐसे ही होते हैं| हम जैसा चाहें उनका प्रयोग कर लें, या लाभ उठायें, आनंद लें अथवा हानि के साथ साथ व्यथित भी हों| सुन्दर रचना के लिए साधुवाद आपको,

    priyasingh के द्वारा
    April 10, 2011

    छोटे छोटे शब्द होते है पर बहुत बड़ा चक्रव्यहू खड़ा कर देते है …………….. रचना को सराहा आपने शुक्रिया….

Alka Gupta के द्वारा
April 9, 2011

प्रिया जी, इन शब्दों का करिश्मा ही कुछ ऐसा है कि हर कोई इनके फेर में पड़ कर रहस्य को नहीं समझ पाते हैं और शब्दों की धारा में बहते चले जाते हैं ! बढ़िया काव्य रचना !

    priyasingh के द्वारा
    April 10, 2011

    सही कहा आपने शब्दों का रहस्य कोई नहीं समझ पाता………. सराहना के लिए शुक्रिया……….

baijnathpandey के द्वारा
April 9, 2011

प्रिया जी ,सादर अभिवादन सुबोध एवं सुस्पष्ट शब्दों में आपने बड़े पते की बात कही है ……..विचारों की रस्साकस्सी को परिणाम तक पहुंचाती हुई सार्थक कविता | बधाई |

    baijnathpandey के द्वारा
    April 9, 2011

    अगर आप अपना नाम प्रियका लिखती हों तो कृपया अन्यथा न लें | धन्यवाद |

    baijnathpandey के द्वारा
    April 9, 2011

    अगर आप अपना नाम प्रियंका लिखती हों तो कृपया अन्यथा न लें | धन्यवाद |

    priyasingh के द्वारा
    April 10, 2011

    प्रशंशा के लिए शुक्रिया………….दोनों ही मेरे नाम है आप जो चाहे लिख सकते है ……………

Rajkamal Sharma के द्वारा
April 9, 2011

प्रियंका जी ….नमस्कार ! एक सीधी और सरल रचना के द्वारा आपकी वापसी हुई है ….. शब्दों की बजाय बेजुबान आँखों की बात कहता हूँ , आपका प्यारा सा नटखट +शैतानिया करने वाला बच्चा आज नज़र नहीं आ रहा , वोह कब आएगा ? धन्यवाद

    priyasingh के द्वारा
    April 10, 2011

    मेरा प्यारा नटखट बच्चा यही है अपनी माँ के पास ……………अब जब आपने अपनी तस्वीर लगा दी तो मैंने सोचा की अब मुझे भी ये काम कर ही लेना चाहिए …………….


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