priyanka

no defeat is final until you stop trying.......

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आंटी मत कहो ना.........

Posted On: 24 May, 2012 Others में

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गर्मी तो बढ़ ही गयी है और आज सुबह पेट्रोल का दाम देख कर गर्मी का अहसाह कुछ ज्यादा ही बढ़ गया ………….महंगाई आसमान छु रही है जब तक शादी नही हुई थी तब तक किसी भी चीज़ के दाम बढ़ने से कोई फर्क नहीं पड़ा ……….वैसे शादी के कुछ सालो तक भी नहीं पड़ा था ……..लेकिन अब जैसे ही किसी चीज़ के दाम बढ़ते है दिमाग अपना हिसाब किताब लगान शुरू कर देता है पर पढ़ाई के दिनों से ही मेरी गणित कमज़ोर ही रही है भला हो मोबाइल वालो का ……………. अब मोबाइल हाथ में हो तो कैलकुलेटर ढूंढने की भी जरुरत नहीं पड़ती …….. शादी होने से हिसाब किताब करने की मुसीबत बढ़ी तो माँ बनने के बाद दूसरी मुश्किल आन खड़ी हुई ……..आप सोच रहे होंगे बच्चे संभालने की मुश्किल तो ऐसी कोई बात नहीं है वो तो हर औरत माँ बनते ही अपनी समझ से सीख ही जाती है ये दूसरी मुश्किल है वजन घटाने की मुश्किल ……………. वजन इतना बढ़ जाता है की आप अपने आपको ही पहचान नहीं पाते ही जब भी शीशे के सामने खड़े हो तो लगता है की चेहरा तो अपना ही है पर ……….बाकि कुछ भी अपना अपना सा नहीं लगता …….शुरू शुरू में मारे ख़ुशी के ध्यान ही नहीं गया इस ओर पूरा का पूरा ध्यान बच्चे पर रहता है ……….फिर वो स्वादिष्ट सोंठ के लड्डू, और ढेर सारा घी, मलाई वाला दूध, मेवे सब प्यार से खिलाते जाते है और हम खाते जाते है ………….और थोड़े दिनों बाद हम भी उन्ही लड्दुओ की तरह हो जाते है ……………. मुझे इसका अहसास जब हुआ जब अपने नन्हे मुन्ने को लेकर पार्क में गयी और वहाँ खेल रहे बच्चे ने कहा आंटी बाल दो न ……….. और ये शब्द यूँ गुंजा कान में की पूछिए मत ……..आंटी आंटी आंटी ………… कान ही झनझना गए …………….अभी कुछ सालो तक तो मै खुद ही लोगो को आंटी कहा करती थी और आज मै खुद आंटी बन गयी …………. उफ़ बड़ी परेशानी ………….वैसे कम परेशानी थी ज़िन्दगी में ………………… की अब एक नयी समस्या मोटापे की समस्या…………. पतिदेव भी कहाँ पीछे रहते उन्होंने भी कुछ नए नाम रख दिए मुझे प्यार से पुकारने के लिए ……………..और अभी एक दिन क्या हुआ वो सुनिए………. मै यहाँ अपने मायके आई हुई हूँ ……………. डैडी जज है तो उनसे मिलने सिविल जज आये अपनी पत्नी के साथ तो मै भी बाहर निकली उनके साथ मेरे नन्हे मुन्ने की उम्र का बच्चा भी था दोनों खेलने लगे और मै उनकी पत्नी से बाते करनी लगी बाते करते हुए ये लग तो रहा था की उसे पहले कहीं देखा है पर याद नहीं आ रहा था फिर बातो बातो में पता चला की वो ग्वालीअर की रहने वाली है तो मैंने बताया की हम भी वहाँ रह चुके है मैंने अपनी ९, १० ११ की पढ़ाई वही से की है तो उसने पुछा किस स्कूल से तो मैंने बताया मिस हिल स्कूल से तो उसने कहा की अरे वो भी वहीँ की पढ़ी हुई है फिर क्या हमने स्कूल की वहां के टीचर्स की ढेर सारी बाते की और फिर थोड़े देर बाद वो चले गए …………… अगले दिन उसका फोन आया तो वो कहती है की अरे तुम वही प्रियंका हो न जो स्कूल के पास की कालोनी में रहती थी और तीन साल बाद पापा के ट्रांसफर होने की वजह से स्कूल छोड़ कर चली गयी थी तो मैंने कहा हाँ वही हूँ …………तब वो कहती है बेवकूफ हम एक ही क्लास में साथ साथ पढ़ते थे और देखो हमने मिलने पर भी एक दुसरे को पहचाना नहीं ……………….कहती है मन में तो लग रहा था की तुम्हे कहीं देखा है पर याद नहीं आ रहा था मैंने कहा मन में तो मुझे भी लग रहा था पर पहचानते कैसे अपने बच्चे की अम्मा और दुसरे बच्चो की आंटी बनने के बाद चेहरे और कद-काठी में इतना अंतर जो आ गया है ………………. इतना हँसे हम फोन पर.. …………हम दोनों ही एक दुसरे को मिलने पर पहचान नहीं पाए ………………….स्कूल के दिनों में हम जब कभी घर या मम्मियो की बाते करते थे तो यही कहा करते थे की मम्मी लोगो को तो कोई काम नहीं है बस पड़ोस की आंटी के साथ यही बाते करती है की आज रात के खाने में क्या बनाना है तो सुबह के नाश्ते में क्या बनाना है सब्जियों के दाम कितने बढ़ गए है ………या फिर आजकल के बच्चे कितने बदमाश होगये है , पतियों का गुस्सा वगैरह नहीं तो टी.वी सिरिअल की बाते …………..ये सब बाते करते हुए हम यही कहते थे की कितनी बोरिंग बाते करती है न ये आंटिया हम तो ऐसी बाते कभी नहीं करेंगे और आज देखो हमारी बातो में भी घूम फिर कर यही सारी बाते रहती है ………………..पता ही नहीं चला कब हम कब खुद आंटी बन गए ……………… पर तब ज्यादा कोफ़्त होती है जब आंटी कहने वाला खुद मेरे चाचा की उम्र का रहता है तब मन करता है की जोर से चिल्ला कर कहू की….. ..आंटी मत कहो ना अंकल…………..ओह लिखना यही बंद करना पडेगा क्योंकि मेरे नन्हे मुन्ने ने क्रीम की बोतल पूरी अपनी हाथ में उड़ेल ली है …………..इसकी बदमाशियों के बारे में भी एक दिन फुरसत से जरुर कुछ लिखूंगी …………….अभी के लिए शुभ रात्रि……………

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23 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

November 28, 2012

प्रिया जी बहुत ही खुबसूरत आलेख बधाई ,,,,,,,,,,,,,

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
May 27, 2012

सुन्दर व्यंगात्मक आलेख प्रिया जी.किसी भी महिला को आंटी कहलाना अच्छा नहीं लगता.वैसे पुरुषों को भी अंकल कहलाना अच्छा नहीं लगता चाहे वे किसी भी उम्र के हों.

akraktale के द्वारा
May 26, 2012

प्रिया जी सादर नमस्कार,चलिए मै आपको आंटी नहीं कहता, शायद इस नाम के साथ कुछ मुश्किल मुझे भी होगी. मगर मुझे लगता है कभी कभी अंकल या आंटी कहलाना भी अच्छा लगता है.हाँ अवश्य ही अंकल के मुंह से कतई नहीं. शुक्र है महिलाओं को गंजेपन का सामना नहीं करना पड़ता. मेरे एक मित्र जो की अभी पचास भी पार नहीं कर पाया है मोटापे और गंजेपन का शिकार एक दिन रेलवे रिजर्वेशन की कतार में किसी बच्चे ने उसे कह ही दिया ” अंकल सीनियर सिटिजन की लाइन में लगीये ना.” और जब उन्होंने उस बालक को समझाने का प्रयास किया तो वह मानने को तैयार भी नहीं हुआ. चलिए होते होते आपको भी हो ही जायेगी —- सुनने की आदत. एरोबिक्स का प्रयोग कुछ दिन शायद राहत दे. आपने बहुत सुन्दर मगर करुण हास्य प्रस्तुत किया है. बधाई.

    Mande के द्वारा
    October 17, 2016

    I’ve always thought their point was that the net worth wasn’t important: the work that they do to achieve the net worth is where their focus is at (and should be). I’ve found that if I focus on the efeistfvenecs of my activities, net worth takes care of itself.

अजय कुमार झा के द्वारा
May 26, 2012

:) :) उम्र के इस पडाव पर पहुंचने के खूबसूरत अनुभव बांटना अच्छा लगा ।

May 26, 2012

मुझे मत मरो मेरा क्या कसूर है………. http://satyaprakash.jagranjunction.com/2012/05/25/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%9D%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A4%A4-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8B-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E2%80%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%B8/#comment-१२ किसी भी धर्म के लोग हो उन्‍हे आगे आकर इसका विरोध करना चाहिए और सरकार से भी निवेदन करना चाहिए कि इस तरह के कार्यक्रमो पर रोक लगायी जाय, मै आप सभी का आग्रह करना चाहता हुँ कि आप निम्‍न माबाईल न0 फोन कर इसे राकने का आग्रह करे जिलाधिकारी गोरखपुर 9454417544 आयुक्‍त गोरखपुर 9454417500 एस एस पी गोरखपुर 945440273 आई जी गोरखपुर 9454400209 एस पी आरए 9454401015 योगी आदित्‍यनाथ सांसद गोरखपुर 0551-2255454, 53

yamunapathak के द्वारा
May 26, 2012

प्रियाजी,आपका लेख शीर्षक के साथ आकर्षित गया.एक बात बताती हूँ,एक शोध के अनुसार अब कहा जा रहा है की ३५ के बाद सौंदर्य बढ़ जाता है.कितना सच कितना झूठ नहीं पता पर ये ज़रूर है की उम्र के साथ आने वाली परिपक्वता खूबसूरती में इजाफा ही करती है.

yogi sarswat के द्वारा
May 26, 2012

ओह ! सच में प्रिय जी , जब आंटी या अंकल कहने की नौबत आ जाती है तो थोडा सा लगने लगता है की हाँ अब हम भी बुढ़ापे की सीढियां चढ़ने वाले हैं ! लेकिन उम्र है , बढती है , इसे बस ऐसे ही लेना चाहिए ! बढ़िया लेखन !

चन्दन राय के द्वारा
May 26, 2012

प्रिया जी , आपको आंटी चुभता है , पर उन युवा लडको से पूछिय , जिन्हें लडकिया बड़े प्यार से भैया की गहरी भरी चोट मारती हैं , कंही आप भी उनमे से तो नहीं , मजाक कर रहा हूँ ,

    priyasingh के द्वारा
    May 26, 2012

    दर्द अपने अपने सबके पास है …………..किसी के पास आंटी किसी के पास भईया का ……..हाँ पर ये तो है लडकियां भैया की चोट तो बहुत मज़े से देती है अब हम भी क्या करे अगर भैया न कहे तो लड़के कुछ और ही गीत गाने लगेंगे………….इसलिए हम लोग प्यारी बहनिया बन जाते है ……… लगता है आप को कई लडकियों ने भैया कहके पुकारा है ……………….ही ही हहा हा…………..

Mohinder Kumar के द्वारा
May 25, 2012

प्रियंका जी, सुन्दर हास्य लेख. शुरु शुरु में आंटी / अंकल सुनना थोडा अटपटा लगता है फ़िर आदत हो जाती है और उम्र भी. वैसे कुछ आंटियां और अंकल तो इतने स्मार्ट होते हैं कि दिल चुरा लेते हैं…. ही ही

    priyasingh के द्वारा
    May 25, 2012

    हाँ और आदत पड़ते ही शायद बुरा लगना भी बंद हो जाता है …………हाँ कुछ अंकल आंटी है ऐसे जो अभी भी सबका दिल चुराने में लगे है सलमान खान करिश्मा कपूर आमिर खान शाहरुख़ कबके अंकल आंटी बन चुके है पर लगता नहीं है पता नहीं क्या खाते है………….आभार आपका…………

jlsingh के द्वारा
May 25, 2012

आदरणीय प्रियंका जी, सादर अभिवादन! आपने तो ‘हम पांच’ धारावाहिक की याद दिला दीं जिसमे ‘आंटी मत कहो न!’ जुमला हुआ करता था! आज हम पांच के सारी बच्चियां आंटी या आंटी जैसी हो गयी हैं! अच्छा लगा आपका लेखन!

    priyasingh के द्वारा
    May 25, 2012

    बिलकुल सही पहचाना आपने शीर्षक वही से लिया मैंने …………..आपको अच्छा लगा शुक्रिया…………..

dineshaastik के द्वारा
May 25, 2012

आदरणीय  प्रियंका जी, यह व्यथा केवल आपकी नहीं हैं, अधिकांश  महिलाओं की है। मेरी शादी को 25 वर्ष  हो गये हैं। मैं जैसा पहले था वैसा ही आज  हूँ और मेरी पत्नि पहले मुझसे दुबली थींऔर आज  मुझसे डबल।शादी के समय के एलबम को मेरे बच्चे  भी नहीं पहचान पाते अपनी माँ की तस्वीर को। आपके मुन्ने का बारे लिखे आपके आलेख  के इंतजार में…..

    priyasingh के द्वारा
    May 25, 2012

    हा हा ही ही.. सच में शादी का एल्बम देखते हुए मेरा नन्हा मुन्ना भी अब यही पूछने वाला है की ये कौन है दुबली पतली सी लड़की……………..आभार आपका……………

rajkamal के द्वारा
May 24, 2012

गलाेूआदरणीय प्रियांका जी ….. सादर अभिवादन ! जीवन की जमीनी हकीकतों को ब्यान करता हुआ आप का यह मजेदार लेख पढ़ रहा था तो मन में दो ख्याल आ रहे थे *काफी समय पहले डाई की एक मशहूरी में जब एक महिला को आंटी कहा जाता है तो घर में आकर आईना देखती है ….. *आजकल बिग बी की बहु का हाल भी कुछ कुछ ऐसा ही है अब तो यही देखन होगा की उनको कांस फिल्म समारोह में रेड कारपेट के उपर वाक करने का सुनहरा अवसर मिलता है की नहीं कोई चाहे कुछ भी कहे लेकिन इस बात से तो यही साबित होता है की ससुराल वाले अपनी बहुओं के खाने पीने का अच्छा ख़ासा ध्यान रखते है बल्कि जरूरत से ज्यादा मुबारकबाद :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-? :-x :-) :-? :-x :-) :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-P :-? :-x :-) :evil: ;-) :-D :-o :-( :-D :evil: ;-) :-D :mrgreen: :-? :-x :-) : :roll: :oops: :-D :-o :-( :-? :-x :-) :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-)

    priyasingh के द्वारा
    May 25, 2012

    हाँ ये सही कहा आपने हमारे भारतीय समाज में हर एक ख़ुशी में खाने पिने का विशेष ख्याल रखा जाता है और ये अवसर तो होता ही ख़ास है ……….. लेकिन आवश्यक भी होता है की जम कर खाया पिया जाये अपने आपके साथ बच्चे के लिए भी जरुरी है ………….. ऐश्वर्या जी तो कान्स में भी गजब ढा रही है सब माया है……………लेख को अपना समय देने के लिए आभार…..

VIVEK KUMAR SINGH के द्वारा
May 24, 2012

शुभ रात्रि प्रिया जी | चलिए मैं लोगों से प्रार्थना करूंगा की आपको आंटी न कहें |

    priyasingh के द्वारा
    May 25, 2012

    धन्यवाद आपका……. पर इतनी पीड़ित नहीं हूँ की आपको प्राथना करनी पड़े……..


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